Tuesday, 24 March 2020

कोरोना वायरस के संक्रमण | 3 लक्षण, 4 सरल बचने के उपाय


Written by Anil Singh


कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलाव को रोकने के उद्देश्य से भारत सरकार अथवा विभिन्न राज्य सरकारों ने 14 अप्रैल 2020 तक लॉक डाउन घोषित किया है | कुछ दिनों पहले, देश के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत सरकार के इसी निर्णय को देश के साथ साझा किया | यह किसी प्रधान मंत्री का अपना निर्णय नहीं है, यह भारत सरकार का निर्णय है |

सरल शब्दों में समझें, तो 'लॉक डाउन' का अर्थ लोगों को एक दायरे में बंद करना है | कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए लोगों को यह निर्देश दिया गया है कि वे जहाँ हों वहीँ रहें |

उत्तराखंड राज्य सरकार ने दवाई अथवा अन्य जीवन रक्षक सुविधाएं प्रतिष्ठानों को छोड़कर, अन्य सभी दुकानों, प्रतिष्ठानों  को बंद करने का निर्णय लिया है | इसके अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति को यह कहा गया है कि वे यदि अंत्यंत आवश्यक न हो तो घरों, डेरों आदि से बहार न निकले |

एक अच्छे नागरिक की तरह इस लॉक डाउन का पालन करें | यह भारत सरकार अथवा आपकी राज्य सरकारों का आदेश है | प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री मात्र आप तक यह आदेश पहुंचा रहे हैं |

विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा कोरोना संक्रमण के लक्षण इस प्रकार हैं :

फेफड़ों में दर्द (सीने में दर्द या सांस लेने में मुश्किल), सूखी खांसी के साथ ही तेज बुखार |

उपाय के तरीके :

भीड़ की जगहों से बचें
आपस में बात चीत करते हुए कम से कम 5-6 फ़ीट की दूरी बनाएं |
अनावश्यक अपने आँख, नाक और मुंह को न छुएं |
हाथ साफ़ रखें |
किसी भी साबुन से अपने हाथों को लगभग 20 सेकण्ड्स तक अच्छी तरह धोएं |

कोरोना संक्रमण के कारण किये गए इन लॉक डाउन से कई रोज कमाने खाने, दिहाड़ी करने वालों और अपने दुकान/प्रतिष्ठान चलाने वालों को सामान्य से गंभीर आर्थिक समस्या हो रही होगी। भारत सरकार और राज्य सरकार इसका कुछ समाधान अवश्य ढूंढ रही होगी |

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Saturday, 7 March 2020

Agricultural, fallow land in Uttarakhand Hills | Economic Development Model


Written by Anil Singh


Developing food processing, agri products, handicraft sale, small scale industries, MSMEs by way of People run cooperative, SHGs and state govt. assisted marketing, micro-financing.


What is the correct economic development model for Uttarakhand?

The Uttarakhand Govt. is thinking over this question.

One policy on which it is already working is to invite big businesses to the state and provide them the necessary land they want to establish the foundation for the economic development. Under this model, the big businesses are encouraged to do what the state Govt. half-heartedly did by of way of, Co-operatives, Self Help Groups (SHGs) and state Govt. assisted marketing, micro financing.

To what extent, the new model will work, only time will tell; but giving big businesses uncontrolled accesss to Uttarakhand's land resources has its own risks. Ideally, had here been proper land ceiling for other state domiciles, the state could have easily copied the Himachal Pradesh model of development where a well functioning food processing, agri products, handicraft sale, small scale industries, MSMEs were set up by way of People run cooperative, SHGs, home grown entrepreneurs and state govt. assisted marketing, micro-financing.

But the state Govt. seems less inclined on that model and more inclined on calculating the agricultural and fallow land in Uttarakhand.

In a reply to a Question put in the Uttarakhand state assembly by BJP legislator from Jhabreda Deshraj Karanwal recently, agriculture minister Subodh Uniyal said --- the hill areas of the state in 2000-01 had a total 5,17,628 hectares of agricultural and fallow land. The total land in hill areas has reduced to 4,92,643 hectares in 2017-18. Out of which 7,704 hectare has turned barren.

The minister added that in Udham Singh Nagar district, a total of 56.42 hectare agricultural land is proposed to be used for other projects. Similarly, 2,144 hectares in Nainital and 1,204 hectares in Haridwar district will be used for other works.

It must be noted that merely calculating the cultivated and barren land in Uttarakhand will NOT serve much purpose. The state is struggling with the big differences in the per person incomes. The per person (or family income if you see it better for comparison) is NOT uniform in the state. Majority of people in Uttarakhand are living much below the BPL level (Below Poverty Level). The Govt.'s economic policy must solve that problem first.

In addition, the state of Uttarakhand has certain other limitations. It is not a big state. There is high unemployment. The land holdings are small. The economic growth model must take into account all these factors. Doling out land resource to big businesses will have very limited impact on the lives of the people. May be the state needs more honest initiatives.

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Sunday, 1 March 2020

भारत में मंदी के संकेत | रोज़गार आयु सीमा बेरोज़गार व्यक्ति के लिए कुछ सुझाव


Written by Anil Singh


भारत में मंदी के संकेत | आने वाला समय रोज़गार के लिए भी मंदा ही रह सकता है | रोज़गार आयु सीमा के किसी भी बेरोज़गार व्यक्ति लिए कुछ सुझाव


आप किसी भी आयु वर्ग के हों, एक बात तो मान ही सकते हैं की भारत में बेरोज़गारी बहुत अधिक है | भारत में बेरोज़गारी का स्तर अमूमन अधिक ही रहता है | पर वर्त्तमान समय में यह बहुत अधिक है | रोज़गार आयु सीमा के भीतर आने वाले हर 100 में से 15 युवा बेरोज़गार हैं | जिनके पास रोज़गार है वह भी या तो केवल आधे अधूरे तौर पर रोज़गार में होते हैं, या वे अपनी शिक्षा के अनुसार नौकरी नहीं पाते हैं | साल में 180 या 240 दिन से कम समय तक अपनी शिक्षा अथवा कुशलता से कम की नौकरी, सही अर्थ में रोज़गार नहीं है | इस बात पर असहमत होने जैसी कोई बात नहीं है |

पिछले कुछ वर्षों से स्वरोज़गार की बहुत चर्चा की जा रही है | स्वरोज़गार एक अच्छा विकल्प है, पर स्वरोज़गार या अपना काम धंदा सबके लिए नहीं है | इसमें न केवल असफल होने की संभावना बहुत अधिक है बल्कि अधिकांश स्वरोज़गारों में जोखिम की भी असीमित सम्भावना होती है | यदि स्वरोज़गार इतना सरल होता तो इस संसार में कृषि छोड़कर, हर कारोबार के क्षेत्र में नौकरी करने वाले लोगों से अधिक कारोबारी होते | कृषि में भी भूमि पर एक परिवार के समस्त सदस्य निर्भर होते हैं | तो यह भी एक तरह से रोज़गार ही पैदा करती है | आज के स्टार्टअप की दुनिया में स्वरोज़गार आकर्षक दिखता है पर विकसित देशों में भी प्रत्येक 100 में से 20 स्टार्टअप अपने पहले साल में ही बंद हो जाते हैं | आप चाहें तो स्वरोज़गार का रुख करें पर इसकी एक नौकरी से तुलना करना बचपना ही माना जायेगा |

भारत में बढ़ती बेरोज़गारी के समय में एक बेरोज़गार युवा या कोई भी बेरोज़गार क्या करे ?

अभी कुछ समय से भारत में मंदी के भी संकेत हैं | आने वाला समय रोज़गार के लिए भी मंदा ही रह सकता है | ऐसे समय में यदि आप रोज़गार आयु सीमा के कोई भी बेरोज़गार व्यक्ति हैं, तो आपके लिए कुछ सुझाव :
  • अपनी कार्यकुशलता का सही आंकलन करें |
  • शीघ्र धनवान होने वाली योजनाओं से बचें |
  • नौकरी दिलाने के झांसे में पड़ कर समय और धन न गवाएं |
  • जोखिम का आंकलन कर, स्वरोज़गार में सोच विचार के जोखिम लें |
  • खर्चे नियंत्रित करें |  
  • हतोत्साहित न हों | आप आजीविका के लिए प्रयास करते रहें |  यदि अर्थव्यवस्था को मंदी में आने कुछ वर्ष लगे हैं तो इसे जाने में भी कुछ समय लग सकता है | 
  • अपना सही आंकलन करें | देखें आप अपनी आयु अनुरूप आर्थिक दृष्टि से कितने आत्मनिर्भर हैं |
  • यदि आप अभी भी आर्थिक अथवा धन की दृष्टि से किसी अन्य पर निर्भर हैं तो सोचें ऐसा क्यों है |
  • आप अपने समय का प्रयोग कैसे करते हैं इस पर भी ध्यान दें |  कहीं आप अपने समय को बेकार विषयों या कार्यों में ख़राब तो नहीं करते | 
  • मोबाइल का प्रयोग केवल जरूरत के लिए करें | 
  •  अपना हित समझें | 
एक उदाहरण --- ऐसा देखा गया है कि  नौकरी आयु वर्ग के युवा, युवतियां बहुत सरलता से धर्म और राष्ट्रवाद की संकीर्ण (छोटी) सोच से प्रभावित हो जाते हैं | यहाँ धर्म का मतलब दूसरे धर्म के लिए असहज होना है | ठीक इसी प्रकार अति राष्ट्रवाद का अर्थ भारतीय सैन्य बालों (फ़ौज इत्यादि) के लिए, देश की सुरक्षा के लिए बहुत सरलता से विचलित हो जाना है | दोनों ही भावनाएं ठीक नहीं हैं | अपने धर्म को श्रेष्ठ मानना गलत नहीं, पर इसका अर्थ यह नहीं की दूसरे धर्म किसी भी प्रकार कम श्रेष्ठ हैं | सब धर्म अपने में श्रेष्ठ हैं | अच्छा हो की हम हर धर्म को उस पर छोड़ दें | सब धर्मों का आदर करें | इसका पहला फायदा यह होगा की आप शांत रहेंगे और जीवन के अच्छे मुद्दों पर ध्यान देंगे | 

इसी प्रकार, देश के सैन्य बलों और देश की सुरक्षा को लेकर व्यर्थ चिंतित न हों | ये विषय भावुक होने के नहीं हैं | हमारा देश आर्थिक रूप से जितना सक्षम है , उससे तुलना करें तो देश अपने सैन्य बलों और उनके परिवारों के लिए उत्तम आर्थिक, वित्तीय, स्वास्थ्य, महंगाई, शिक्षा और सामाजिक संसाधन उपलब्ध कराता है | न केवल सैन्य कर्मियों की अपितु परिवार की भी जिम्मेदारी देश अपने ऊपर लेता है | देश न केवल सैन्य कर्मियों/परिवारों की पेंशन व अन्य सुविधाओं के लिए आजीवन प्रतिबद्ध है, साथ ही देश यह भी निश्चित करता है कि वे सेना में नौकरी के पश्चात् दूसरी नौकरी पाएं |  इस लिए आने वाले समय में भी आप सेना के लिए आश्वस्त हो सकते हैं | रही देश की सुरक्षा की चिंता तो देश के द्वारा अपनी और नागरिकों की रक्षा के लिए ही सेना बनाई जाती है | अतः देश की सुरक्षा को लेकर व्यर्थ चिंतित न हों | 

आप अपने कार्य पर ध्यान दें | अपनी जेबें टटोलें | यदि कमी लगती है तो प्रयास करें | यदि कोई भी व्यक्ति आपको संकीर्ण (छोटी) सोच से प्रभावित करता है, तो देखें की आपकी और उसकी आर्थिक, वित्तीय हालत में क्या अंतर है | यदि है, तो व्यर्थ के विवाद में पड़ने के बजाय अपने जीवन पर ध्यान दें | स्वयं को आर्थिक, वित्तीय अन्य दृष्टि से सबल बनाएं |

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